केदार भंडारी की मां बोली की अगर उनका बेटा इस दुनिया में नहीं है तो उसका शव ही सौंप दें

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मनोज शर्मा

इस साल 18 अगस्त को जब केदार देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होने के लिए घर से जब निकला तो मां-बाप को नहीं पता था कि ये उसकी आखिरी मुलाकात होगी। पुलिस मां-बाप को जांच के नाम पर केवल टरका रही है। वहीं, मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद मां-बाप को न्याय की आस जगी है।

उत्तराखंड पुलिस की लापरवाही फिर सामने आई है। अंकिता भंडारी की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी की एक और मामले में पुलिस की किरकिरी होती हुई दिखाई पड़ रही है। पौड़ी के केदार को चोरी के शक में उठाया। 21 अगस्त के बाद केदार को कुछ पता नहीं चला है। 21 अगस्त को ऋषिकेश के तपोवन स्थित एक होटल से पुलिस ने केदार को उठाया था,

अग्निवीर भर्ती के लिए घर से निकलने वाले केदार भंडारी के माता-पिता की आंखें अपने लाल  को याद कर कर कर सिरह रहे हैं। हर पल बरसती आंखें हर किसी से अपने 19 वर्षीय बेटे को ढूंढ कर लाने की गुजारिश कर रही हैं। उनका बेटा कहां है, किस हालत में है, है भी या नहीं, यह जानने के लिए परिजन पल-पल तड़प रहे है। वहीं, पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। जिसकी वजह से उन लोगों को राजधानी देहरादून में आकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बैठकर सरकार से न्याय की गुहार लगानी पड़ी। रो-रोकर बेटे को याद करने वाली मां का कहना है कि उनका बेटा जिंदा है तो उसे वापस लाए और अगर वह किसी अनहोनी का शिकार हुआ है तो कम से उसका शव ही उनको सौंप दें, जिससे वे मान लें कि उनका बेटा अब वापस नहीं आएगा। वे उसका अंतिम संस्कार तो कर सकेंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या पौड़ी की अंकिता भंडारी की तरह ही पौड़ी का केदार भंडारी भी पुलिसिया कहानी का शिकार बन गया है। जिस तरह से अंकिता भंडारी का मामला प्रदेश और देश भर में सुर्खियों में था। वहीं अब केदार भंडारी  के मामले में भी प्रदेश और देश भर में उत्तराखंड पुलिस की किरकिरी हो रही है । मामला अब हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद परिजनों में बेटे की जानकारी मिलने की उम्मीद जागी है।

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