यूपी के कई शहरों से उत्तराखंड में आ रही मिलावटी मावे व मिठाइयों की खेप, ऐसे करें पहचान

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मनोज शर्मा

होली का त्यौहार नजदीक है होली में गुजिया एक विशेष व्यंजन होती है गौर करने वाली बात है कि नकली मावे और मिठाई की सप्लाई यूपी के सहारनपुर मुजफ्फरनगर आदि क्षेत्रों से उत्तराखंड में होती है पहले लोग इसे घर पर ही बनना पसंद करते थे लेकिन आजकल की व्यस्तता भरी जिंदगी मैं लोग बाजार से बनी हुई रेडीमेड गुजिया लेना ही पसंद करते हैं जिसका पूरा फायदा नकली मावा बनाने वाले लोग उठाते हैं,

इसमें सबसे बड़ी बात है कि नकली मावे और मिठाई की सप्लाई यूपी के सहारनपुर और मुजफ्फरनगरआदि क्षेत्रों से उत्तराखंड में होती है काशीपुर की ही अगर बात करें तो शहर में 50 कुंटल मावी की खपत है मावा बनाने वाले बड़े विक्रेताओं ने बताया कि वह अपने प्रतिष्ठान में ही मावा बनाते हैं जो कि 300 से लेकर 350 तक बेचते हैं साथ ही बताया कि बाहर से आने वाला मांवा 200 से 250 रुपये तक बिकता है जो कि सस्ते के चक्कर में लोग खरीद लेते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मावे में गैस की खपत ज्यादा नहीं होती और दूध भी कम दामों पर मिल जाता है तो उनकी लागत भी कम आती है इस वजह से वह सस्ता होता है लेकिन यूपी के क्षेत्र से आने वाले मावे की गारंटी नहीं ले सकते सामने का बना हुआ मावा ही खरीदा जाए तो बेहतर होगा,

होली के त्यौहार में मावे से तैयार मिठाइयों की भारी डिमांड रहती है गुझिया से लेकर अन्य जितनी मिठाई हैं वह मावे से ही तैयार की जाती है गढ़वाल के अधिकांश क्षेत्रों में नकली मावे और मिठाई की सप्लाई सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जो कि उत्त्तराखंड की सरहद से  मिले हुए जिले हैं से होती है पौड़ी, टिहरी, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग और देहरादून के कई क्षेत्रों में इन जिलों से सप्लाई होती है पश्चिम यूपी से बसों के जरिए मिलावटी मावा राज्य तक पहुंचाया जाता है ऐसा नहीं है कि इन पर कार्रवाई नहीं की जाती पिछले कई वर्षों से देखा जाए तो हरिद्वार शहर को ही ले ले जितने भी सैंपल हरिद्वार से लिए गए उसमें से आधे से ज्यादा फेल निकले 2 साल पहले तो मंगलौर में मिलावटी रसगुल्ला बनाने की फैक्ट्री ही पकड़ी गई थी,

ऐसे करें असली मावे की पहचान

मावे में मिलावट का पता लगाने के लिए आयोडीन टिचर का इस्तेमाल ठीक रहता है ऐसे में मावे की टिकिया बनाकर दो बूंद आयोडीन टीचर मे डालें 5 मिनट बाद मावे का रंग काला होने पर समझ जाएं कि इसमें मैदा मिला है वही टीचर का केसरिया रंग मावे की शुद्धता का प्रतीक होता है, इसके अलावा अगर मावा असली है तो वह एकदम मुलायम दिखाई देगा मावा खाने पर मुंह में चिपके तो इसका मतलब मावा नकली है नकली मावे की लोरियां फटने लगती हैं मावा खाने में कच्चे दूध का टेस्ट दे दे तो असली है

खाद्य सुरक्षा विभाग भी त्योहारों के सीजन में एक्टिव मोड़ पर आ जाता है रविवार को यूपी रोडवेज से लाए जा रहे 40 किलो नकली मावे को केला मोड पर पकड़ा वहीं मंगलवार को बाइक से लाए जा रहे 50 किलो नकली मावे को जो कि यूपी के बंकावाला से लाया जा रहा था जिसको  नष्ट कर दिया गया, इसी बात से यह अंदाजा लगाना बड़ा आसान है कि कितने बड़े पैमाने पर लोगों किस स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है त्योहारों की आड़ में।

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