नशा मुक्ति केंद्र में गड़बड़ी करना अब नहीं होगा आसान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की में बना सजा का प्रावधान,

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मनोज शर्मा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य नियमावली को मंजूरी दे दी है इसके अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य केंद्र नशा मुक्ति केंद्र के मानक कठोर कर दिए गए हैं, इसमें दो साल की सजा और पाँच लाख  रुपए जुर्माने का प्रावधान है,

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य नियमावली को मंजूरी दे दी है इसके अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य केंद्र नशा मुक्ति केंद्र के मानक कठोर कर दिए गए हैं, इसमें दो साल की सजा और पाँच लाख  रुपए जुर्माने का प्रावधान है,

सचिव स्वास्थ्य आर राजेश कुमार ने बताया कि नियमावली में नियमों का उल्लंघन करने में जेल का प्रावधान है तथा बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों नशा मुक्ति केंद्रों पर पहली बार 5 से ₹50000 जुर्माना, दूसरी बार नियम तोड़ने पर दो लाख और बार-बार नियम तोड़ने पर पाँच लाख का जुर्माना लगेगा,

पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है, पंजीकरण न कराने वालों पर पच्चीस हजार का जुर्माना लगेगा, नियम तोड़ने पर पहली बार 6 महीने की जेल और ₹10000 जुर्माना लगेगा, बार-बार नियम तोड़ने पर दो  साल की जेल और पचास हजार से पाँच लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा,

राज्य में मानसिक रोग से ग्रस्त लोगों को उच्च गुणवत्ता वाला उपचार देना होगा, अवैध संस्थानों पर लगाम कसी जाएगी,

सचिव राजेश ने बताया की नियमावली मंजूर होने के बाद अब नशा मुक्ति केंद्र मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में मानसिक रोग विशेषज्ञ नर्सों को पंजीकरण करना अनिवार्य होगा मानसिक रोग विशेषज्ञ से पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा,

13 जिलों में 7 स्थानों पर पूर्णलोकन बोर्ड का गठन किया गया है हरिद्वार, देहरादून, रुद्रपुर में एक-एक बोर्ड बनाया गया है, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले का एक सेंटर श्रीनगर टिहरी, उत्तरकाशी, नई टिहरी बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत का पिथौरागढ़ में बोर्ड गठन किया गया है,

मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को देना होगा पंजीकरण शुल्क, नशा मुक्ति केंद्र मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को अनिवार्य रूप से प्राधिकरण में पंजीकरण कराना होगा इसके लिए शुल्क भी लिया जाएगा एक साल के अस्थाई लाइसेंस के लिए ₹2000 शुल्क होगा इसके बाद स्थाई पंजीकरण के लिए ₹20000 शुल्क देना होगा, नशा मुक्ति केंद्र में मानसिक रोगी को कमरे में बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकेगा, डॉक्टर की सलाह पर ही मरीज को रखा जाएगा और डिस्चार्ज किया जाएगा

केंद्र में फीस, ठहरने खाने का मेनू दिखाना होगा, इलाज को मनोचिकित्सक डॉक्टर रखने होंगे, खुली जगह उपलब्ध करानी होगी जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड के माध्यम से निगरानी की जाएगी।

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