राजकीय शिक्षक उत्तराखंड

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Rajji Bhaniyawala ,,

प्यारे बच्चो, स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं

– माता-पिता से बड़ा हितैषी दुनिया में कोई नहीं, कहीं जाएं तो उन्हें बताएं

– जीवन को अनुशासित, संस्कारवान और संयमित बनाने का प्रयास करें

रायवाला में कल जो घटना घटी, वह हृदयविदारक है। 26 साल की एक लड़की का गला रेत कर हत्या कर दी गयी। उसे दोस्त का जन्मदिन मनाना और उस पर विश्वास करना भारी पड़ गया और जान गंवानी पड़ गयी। उस पिता के दिल के दर्द का एहसास कोई नहीं कर सकता जिसका फर्ज दूसरे को न्याय दिलाना हो लेकिन आज कैसा दिन है उसे ही बेटी के लिए इंसाफ चाहिए। उस पिता का सोच कलेजे में हूक सी उठती है।

 

दो दिन पहले मसूरी में एक कार हादसे में पांच छात्रों की मौत हो गयी जबकि एक छात्रा अब भी जिंदगी के लिए मौत से लड़ रही है। मसूरी घूमने गये थे, दूसरे दिन सुबह साढ़े पांच बजे हादसे का शिकार हो गये। इस घटना से दो-तीन दिन पहले रुड़की के एक युवा की सड़क हादसे में मौत हो गयी। वह परीक्षा देने गया था लेकिन दोस्त के साथ चीला वाली सड़क पर निकल गया और हादसे का शिकार हो गया। माता-पिता दोनों ही खूब कमा रहे थे कि इकलौते बेटे का जीवन सुखमय बीतें, लेकिन बेटा तो असमय ही चला गया। इस दर्द की कोई दवा नहीं है।

 

सवाल यह नहीं है कि कौन इकलौता है और किसके और भाई-बहन हैं। सवाल यह है कि जब भी कोई जवान बच्चा इस तरह हादसों का शिकार होता है तो हर मां-बाप का कलेजा कांपता है। यदि बच्चे को बुखार भी आ जाएं तो मां-बाप को नींद नहीं आती, ऐसे में जब वही बच्चा असमय ही बिना बताए दुनिया से चला जाएं तो सोचो, उन अभिभावकों पर क्या गुजरती होगी? पूरी दुनिया उजड़ जाती है।

 

इन तीनों घटनाओं में समानता यही है कि संभवतः सभी ने अपने पेरेंट्स को पूरा सच नहीं बताया। आज के युग में बच्चों को हर सुविधा और स्वतंत्रता मिल रही है। बच्चे मां-बाप द्वारा दी गयी इस स्वतंत्रता को स्वछंदता मान रहे हैं। ठीक है, गलतियां सब करते हैं। गुनाह भी होता है। मैंने भी जीवन में कई गलतियां और गुनाह किये हैं। युवा खून किसी बंदिश को नहीं मानता। लेकिन आज के दौर में जब सब मतलब परस्त हैं तो बच्चों का समझना चाहिए कि उनका सच्चा दोस्त और सबसे बड़ा हितैषी उनके मां-बाप हैं। उनसे कुछ मत छिपाओ। कम से कम वो बातें तो मत छिपाओ, जिससे आपकी जान को खतरा हो। प्लीज अपने पेरेंट्स को हर वो बात बताओ, जिसमें थोड़ा सा भी जोखिम हो। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह अपने बच्चों को समय दें और उनसे दोस्ताना व्यवहार करें।

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