हरिद्वार में तैनाती के लिए बहुत ज्यादा हर तरीके से प्रयास करते हैं अधिकारी गण

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अशोक गिरी हरिद्वार

Uttrakhnd  में  हरिद्वार  सुंदर जिला है और वैश्विक तीर्थ भी। जिसके कारण अधिकारी यहां तैनाती को लालायित रहते हैं। तीर्थ होने के कारण अधिकारी यहां सेवा देना अपना सौभाग्य भी समझते हैं।मां गंगा के बुलावे पर अनेक अधिकारी बार बार हरिद्वार लौटते रहे हैं। वर्तमान में भी कई पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार में अपनी दूसरी, तीसरी तैनाती में सेवाएं दे रहे हैं और उनके अनुभवों का लाभ हरिद्वार और हरिद्वार की जनता को मिल रहा है।

डा.ललित नारायण मिश्र वर्ष 2018 के बाद तीसरी बार सीडीओ के रूप में हरिद्वार में सेवाएं दे रहे हैं।   वह इससे पूर्व एम एन ए हरिद्वार नगरनिगम और सचिव हविप्रा रह चुके हैं।    सिटी मजिस्ट्रेट कुसुम चौहान 2021 में भी हरिद्वार में तैनात रही हैं। हरिद्वार विकास प्राधिकरण सचिव मनीष सिंह भी इससे पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट,भूमि अध्यापित अधिकारी के रूप में हरिद्वार में तैनात रहे हैं।

अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती भी इससे पूर्व हरिद्वार में रहे हैं। हरिद्वार एसपी नगर बने अभय कुमार सिंह इससे पूर्व हरिद्वार, मंगलौर में क्षेत्राधिकारी रह चुके हैं।    एसपी देहात शेखर सुयाल भी इससे पूर्व हरिद्वार में नियुक्त रहे हैं।   एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल भी हरिद्वार एसएसपी बनने से पूर्व हरिद्वार में तैनात रहे हैं।

रिटायर्ड डीजीपी (अशोक कुमार ) ऐसे आईपीएस रहे हैं जिन्होंने 1996 से 2004 तक एसएसपी के रूप में तीन बार हरिद्वार जिले की जिम्मेदारी संभाली।इसी दौरान हरिद्वार उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड का हिस्सा बन गया।    डा, एस एस संधू हरिद्वार के ऐसे जिलाधिकारी रहे जो केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त की कुर्सी तक पहुंचे।     आई ए एस प्रदीप शुक्ला और नवतेज सिंह को हरिद्वार का जिलाधिकारी रहने के बाद यूपी जैसे बड़े राज्य में मुख्य सचिव बनने का भी सौभाग्य मिला। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन भी 21 मई 2007 से 3 नवंबर 2008 तक हरिद्वार के जिलाधिकारी रह चुके हैं। दुर्भाग्य से हरिद्वार जनपद इस समय (पहाड़   वाद) और ( मैदान  वाद )की चर्चाओं में घिरा है।

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