गांव-गांव तक दवाइयां पहुंचाएगा ड्रोन! AIIMS ऋषिकेश में हुआ सफल ट्रायल
अनिल कुमुद 
ड्रोन हर दिशा में अच्छा साधन साबित हो रहा है. दरअसल, शहरों से गांवों की दूरी काफी होती है. कई बार दवाइयों की जरूरत के लिए घंटों का इंतजार करना पड़ता है. ड्रोन टेक्निक से कुछ मिनटों में दवाइयां आ भी जाएंगी और अगर कुछ भेजना है तो इससे वापस बड़े अस्पतालों तक पहुंचाया भी सकता है
भारत तेजी से ड्रोन तकनीकी को विकसित कर रहा है. ये टेक्नॉलजी न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में बल्कि, एग्रीकल्चर और हेल्थ सेक्टर में बड़ा रोल निभा सकती है. इसके लिए प्रयास भी शुरू हो चुके हैं. आधुनिक खेती के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कई प्रदेशों के किसान कर भी रहे हैं. अब हेल्थ सेक्टर में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा. ड्रोन परीक्षण के लिए ऋषिकेश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और टिहरी गढ़वाल में अस्पताल को चयनित किया गया. इन दोनों अस्पताल के बीच सड़क मार्ग से दूरी 75 किमी थी जबकि हवाई दूरी महज 36 किमी. थी.
100 किमी से 120 किमी तक की है रफ्तार
शर्मा ने बताया कि वर्टिप्लेन एक्स3 सबसे तेज ‘मेड-इन-इंडिया हाइब्रिड’ ई-वीटीओएल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग) ड्रोन है, जिसकी अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा, 100 किमी की दूरी कवरेज और 3 किलो की पेलोड क्षमता है. ड्रोन में दो प्रोपल्शन सिस्टम होते हैं, एक वर्टिकल मोशन के लिए और दूसरा फॉरवर्ड मोशन के लिए. शर्मा ने कहा कि इस साल के अंत तक कंपनी की योजना 25 किलोग्राम भार वहन क्षमता वाला मॉडल पेश करने की है.
