उत्तराखंड: पहाड़ के विधायकों ने अधिक निधि की उठाई मांग, बताए कारण भी,

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मनोज शर्मा 

70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में पहाड़ की विधानसभाओं के लिए विधायक निधि बढ़ाने के साथ ही अलग से बजट के प्रावधान की मांग उठने लगी है. विधायक ने इसके लिए अंतर भी बताएं.

उत्तराखंड के दो जिले हरिद्वार और उधम सिंह नगर मैदान क्षेत्र में आते हैं, जबकि देहरादून और नैनीताल का कुछ हिस्सा पहाड़ तो कुछ मैदान में आता है. लेकिन बाकी नौ जिले पूरी तरह से पहाड़ क्षेत्र में आते हैं. मोटे तौर पर करीब विधानसभा की 35 सीटें पहाड़ में तो 35 सीटें मैदान में आती हैं. पहाड़ के विधायकों का कहना है कि पहाड़ में विधानसभाओं का क्षेत्रफल मैदानी क्षेत्र की विधानसभाओं की अपेक्षा कहीं अधिक है इसलिए पहाड़ में क्षेत्रफल के आधार पर विधायक निधि और बजट का आंवदन होना चाहिए.

कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया और लैंसडौन के एमएलए दिलीप रावत भी मानते हैं कि पहाड़ में क्षेत्रफल तो अधिक है ही विकास कार्यों में लागत भी अधिक आती है. धर्मपुर से विधायक विनोद चमोली का कहना है कि बजट आंवटन की पूरी प्रकिया में ही समीक्षा की जरूरत है. मौजूदा समय में उत्तराखंड में विधायकों को विधायक निधि के रूप में एक वित्तीय वर्ष के लिए तीन करोड़ 75 लाख का बजट मिलता है, जबकि हिमाचल में यही राशि एक करोड़ अस्सी लाख के आसपास है.पड़ोसी राज्य यूपी में सालाना पांच करोड़ की विधायक निधि दी जाती है. अब देखना है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है,

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