मंत्री सतपाल महाराज की बिना सहमति के एचओडी बनाने के मामले ने तूल पकड़ा तूल
मनोज शर्मा
कैसे कोई बिना मंत्री की सहमति के उनके डिजिटल साइन का प्रयोग कर सकता है? और यह बात भी नहीं पच रही है कि रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए मंत्री ने आखिर छह महीने तक इंतजार क्यों किया?
बिना मंत्री की सहमति के उनके डिजिटल साइन के करवाकर फाइल पर अनुमोदन देकर विभाग में एचओडी पद पर प्रमोशन देने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. विपक्ष इस मामले पर बीजेपी को घेर रहा है तो बीजेपी संगठन भी मंत्री से मामले की रिपोर्ट तलब करने की तैयारी कर रहा है.
मामला मई माह का है. आरोप है कि मंत्री के प्राइवेट सेक्रटरी ने उनकी बिना अनुमति के डिजिटल साइन के जरिए इंजीनियर अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग का एचओडी बनाए जाने की फाइल पर अनुमोदन दे दिया और अयाज अहमद विभाग के चीफ बन गए,मंत्री ने छह महीने बाद ये रिपोर्ट दर्ज कराई है, वहीं विपक्ष इस मामले पर बीजेपी को चौतरफा घेरने की तैयारी कर रहा है,मामले में पहले भी एक बार अपर सचिव सचिवालय प्रशासन जांच कर चुके हैं, जिसमें धोखाधड़ी का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. अब रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद सतपाल महाराज ने पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध ली है.उनकी चुप्पी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं|
