कांवड़ मेला सकुशल संपन्न हो गया। इसमें निश्चित ही पुलिस प्रशासन की भूमिका अहम रही। लेकिन D J ke मामले में अगर ऊंचाई के मानकों पर ध्यान दिया जाता तो शायद मेरठ वाला हादसा नहीं होता

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अशोक गिरी हरिद्वार

कांवड़ मेला सकुशल संपन्न हो गया। इसमें निश्चित ही पुलिस प्रशासन की भूमिका अहम रही। हालांकि कई मामलों में पुलिस मेले के योजनानुसार संचालन में फेल भी रही। साइलेंसर रहित बाईकों की रोकथाम में पुलिस काफी हद तक सफल रही लेकिन डीजे की आवाज नियंत्रित रखने और 12 फीट से ऊंचाई की कांवड़ न होने के तय नियम का पुलिस पालन नहीं करा पाई। जबकि यह सब तीन राज्यों की बैठकों में तय हो चुका था। कांवड़ मेले में न केवल 26 फुट से अधिक की कांवड़ ही निकली बल्कि इतनी ही ऊंचाई के भयंकर आवाज वाले डीजे भी मेले में बजते और सड़कों से गुजरते रहे।मेरठ में कल हादसे का शिकार हुए डीजे की ऊंचाई भी 22 फीट थी। यदि मेले में 12 फीट से अधिक ऊंचाई की कांवड़ और डीजे पर रोकथाम रहती तो शायद हादसे का शिकार हुए छह कांवड़ियों की जान बच सकती थी।

अहम बात ये भी है कि यूपी पुलिस ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।हरिद्वार से डीजे बजाते हुए कांवड़िये मुजफ्फरनगर की सीमा में पहुंचे। कहीं भी उन्हें रोका तक नहीं गया। दोपहर को करीब दो बजे कांवड़ जेल चुंगी पर पहुंच गई थी, उसके बाद इंचौली में एक फार्म हाउस के अंदर डीजे को रोक दिया गया ताकि रात के समय डीजे पर लाइट जलाते हुए गांव में उसका प्रदर्शन किया जा सके। पुलिस 22 फीट लंबी कावड़ के साथ सुरक्षा के लिए भी साथ नहीं गई। यदि पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए साथ जाते तो शायद यह हादसा होने से बच सकता था। भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को कांवड़ में डीजे की रोकथाम और कांवड़ों की ऊंचाई का एक निश्चित मानक तय करना होगा । वरना मेले भी होते रहेंगे और हादसे भी! इन आने वाले कांवड़ियों को भी सोचना चाहिए और देखना चाहिए की शासन प्रशासन ने उनकी सुरक्षा के लिए क्या मानक बनाए हैं भूमि मानकों पर चलना चाहिए तभी सुरक्षित यात्रा का लुफ्त ले सकते हैं

 

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